प्रियतम
जब आदित्य कॉलेज में था, तो वह अपनी सीनियर वर्षा के प्यार में पड़ गया। उन्होंने एक-दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया। आदित्य के स्नातक पूरा करने के बाद दोनों ने शादी कर ली।
उनकी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन ब्रह्मांड की कुछ और ही योजना थी। एक दिन, आदित्य का शरीर निर्जीव हो गया, उसका पूरा शरीर और चेहरे का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। उसे गिलियन-बैरे सिंड्रोम का निदान किया गया।
डॉक्टरों ने कहा कि उसके ठीक होने की संभावनाएं बहुत कम हैं। अपनी रिकवरी के दौरान भी उसे शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अपनी हालत के कारण, उसने अपनी पत्नी से उसे छोड़ देने को कहा। लेकिन उसने उसे नहीं छोड़ा। इसके जवाब में उसने कहा – जो भी हम करेंगे, हम साथ में करेंगे और इस समस्या से हम साथ में उबरेंगे।
इससे आदित्य को आत्मविश्वास और समर्थन मिला कि वह बेहतर तरीके से ठीक हो सके। 9 महीनों में उसने अपनी रिकवरी दिखानी शुरू कर दी।
क्या एक महिला को आकर्षक बनाता है?
एक महिला जो न केवल आपके अच्छे समय में आपके साथ आनंद लेती है बल्कि आपके बुरे समय में भी आपके साथ खड़ी रहती है।
मेरे अनुसार, यह एक ही गुण उसे सबसे आकर्षक व्यक्ति बनाता है।
आपको कई लोग मिलेंगे जो आपके अच्छे समय में आपके साथ हंसेंगे, लेकिन केवल एक ही होगा जो आपके रोने या बुरे समय में आपके लिए दुखी होगा।
आपके पास किसी को आकर्षित करने के लिए बहुत सारे गुण हो सकते हैं, लेकिन जब बात समझदारी और समझ के साथ रिश्ते निभाने की आती है, तो यह हर किसी के बस की बात नहीं है।
वह युवा थी, उसके पास विकल्प थे। अगर वह छोड़ना चाहती, तो वह उसे छोड़ देती। लेकिन उसने मजबूती से खड़ी रही और अपने प्यार को किसी भी चीज़ से ऊपर चुना। उसने अपने पति पर विश्वास किया। उन कठिन समयों में, वह हर दिन मुस्कुराती थी ताकि उसके पति को उसकी बीमारी से लड़ने के लिए पर्याप्त प्रेरणा मिले।
वह एक महिला है जो सम्मान के योग्य है!

प्रियतम तुम तो घन सावन के
मैं जेठीली दोपहरी हूं …//
हिस्से में बंदिशें हमारे
पर तुम तो निर्भय स्वतंत्र हो
मैं हूं सामंती छाया में
तुम तो समरथ प्रजातंत्र हो
तुम ही कुछ बोलो दिल खोलो
समझो मैं गूंगी बहरी हूं …
प्रियतम तुम तो घन सावन के,
मैं जेठीली दोपहरी हूं …//
जोर से ठहाका पसरता है
अट्टाहास गूँजता है यकायक
भीड़ ठहरती है सन्नाटे की नोक पर
आँखे विस्मय से भर जाती है
होंठ सूख जाते है
सलवटें उभर आती है ठुड्डी पर
कोई बात थी जो फूट पड़ी कही से
कुछ था जो बजबजा रहा था
एक बुलबुला उठा नीचे से
अकस्मात ही घटित होता है
जिसे हम पूर्व निर्धारित कहते हैं
अंजाम क्या होगा नही पता
विद्रूप समय के मुहाने क़ैद है हम सब
इंतज़ार कर रहें हैं अपनी बारी का

सब कुछ खत्म नही होगा
हम प्रश्नों से घिरे रहेंगें
उत्तरों को तलाश करते
खत्म हो जायेंगे
इसमें ऐ ज़िन्दगी तेरा कुसूर नहीं है
मुझको उदास रहने का शऊर नहीं है
हैं दर्मियान लाख तेरे मेरे दूरियाँ
पर जानती हूँ मैं,तू मुझसे दूर नहीं है
